बलात्कार जैसे कुकृत्यों से ले कर पुलिस अधिकारियों के पास आये फरियादियों के साथ गाली गलौच अश्लील भाषा - ये कौन लोग हैं, ये कैसा मुल्क़ है? क्या एक अकेला मोदी इस पतनशील जर्जर संस्कृति का ह्रास रोक सकेगा? लोग कितने संवेदनहीन और जंगली हो चले हैं।
अरे भाई सूरज (मोदी) कहाँ आ गए इन निशाचरों के बीच,
किसी को नहीं तुम्हारी रोशनी की ज़रूरत है,
अँधेरा फलता फूलता यहाँ,
रुको तुम, अभी सब शिकार में बहुत व्यस्त है।
अरे भाई सूरज (मोदी) कहाँ आ गए इन निशाचरों के बीच,
किसी को नहीं तुम्हारी रोशनी की ज़रूरत है,
अँधेरा फलता फूलता यहाँ,
रुको तुम, अभी सब शिकार में बहुत व्यस्त है।
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