पीके का आडम्बर
मैं ना पंडित और मौलवी ना मैं कोई पुजारी हूँ , अपनी देसी परम्परा का , ना ही मैं व्यापारी हूँ मैं तो एक भारतीय ठहरा , भौंचक्का हो आया हूँ , आज शाम को आमिर तेरी फिल्म देखकर आया हूँ . मेरे अपने कुछ सवाल है , ज़रा खोलकर कान सुनो , सुनो हिरानी , सुनो चोपड़ा , प्यारे आमिर खान सुनो , इस दुनिया के हर मज़हब में कहाँ नही कमियां बोलो , और अछूती रीति रिवाजों से है कब दुनिया बोलो , धर्म सनातन आडम्बर है , और कहानी गढ़ लेते , आलोचना करने से पहले गीता ही तुम पढ़ लेते , आडम्बर ही था दिखलाना , तो कुछ और बड़ा करते , हर मज़हब के आगे , इसका मुद्दा आप खड़ा करते , केवल धर्म सनातन ही क्यों तुमको चुभा बताओ जी , कहाँ नही आडम्बर , कोई मज़हब तो दिखलाओ जी , आडम्बर है यदि देव को दूध चढ़ाना , मान लिया , गौ माता को चारा देना , तिलक लगाना , मान लिया , सारी दुनिया देखी मैंने फैला बस आडम्बर है , होली ईद दीवाली फिर तो क्रिसमस भी आडम्बर है , लक्ष्मी दुर्गा शिव गणेश गर राह...