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Showing posts from September, 2018
स्वागत है आपका, आइये पधारिये, दायें बाएं देखकर आप भी बिराजिये, रंगीन है चश्मा तो उसे फिर उतारिये   बिना लाग लपेट के यूँ ही निहारिये. मुल्क ये हसीन और बहुत संस्कारी है, साधू है, साध्वी है, नेता व्यापारी है. गणतंत्री जलसे की सुगबुगाहट जारी है संसद के आसपास भीड़ बहुत भारी है. गाँव और गलियों में मंच और वक्ता है, भीड़ को जुटाने में लाभकारी भत्ता है, रंगे पुते मुखड़े हैं, नाच है नचनिया है, बगुलों के ग्रास हेतु, तैरती मछलियाँ है. कोई है लूटता और कोई लुट रहा, अस्मत कहीं तो कहीं, राजकोष लुट रहा . वादे हैं कसमे हैं, शोर है तमाशा है, रंगे सियार हैं, लुभावनी भाषा है. नौटंकी कलाकार, चोर और उचक्के कुछ गूंगे बहरे, कुछ कच्चे पक्के आलू टमाटर है, अदरख और लहसन है. दलित और शोषित है, मुल्ले बिरहमन है जुलूस है ईद का, राम की सवारी है दंगों की आग है, लाशों की क्यारी है. मुल्क ये हसीन और बहुत संस्कारी है, गाय और गोबर है, सांप और मदारी है. कहीं कुछ लड़कियां और बलात्कारी हैं आसन की मुद्रा में योग के व्यापारी हैं. फिरते हैं बहुरूपिये छटा बड़ी न्या...