अरविन्द मियां
पिछले कुछ दिनों से दिल्ली के वर्तमान मुख्य मंत्री अरविन्द केजरीवाल और उनकी पार्टी मीडिया की सुर्ख़ियों में है. ऐसा कुछ भी नहीं हुआ कि केजरीवाल ने अपने ऊँचे ऊँचे चुनावी वादों को स्वर्ग से दिल्ली की धरती पे उतारा हो. बल्कि उनके कुछ अनुयायियों ने उनके स्टिंग हथियार को उन पर ही चला दिया. नतीजा केजरीवाल बेनक़ाब हुए. अर्थात अपने शपथ गीत के द्वारा भाईचारा और प्रेम के सन्देश से भीड़ को भावविभोर करने वाले दिल्ली के सुससंस्कृत से दिखनेवाले केजरीवाल कमीने, साले, लात मारना आदि अपशब्दों से अपने कुछ वरिष्ठ साथियों को अलंकृत करते स्टिंग के चपेट में फँस गए. इससे कुछ सप्ताह पहले उनके एक और साथी ने स्टिंग कर चुनाव आचार संहिता और धर्मनिरपेक्ष बातों से लुभाने वाले खुद अपने चुनाव में मुसलिम कैंडिडेट तोड़ो निर्देश देते हुए पकड़े गये. योगेन्द्र यादव, प्रशांत भूषण तमाम उनके आलोचकों को पार्टी कार्यकारिणी से निकाला गया. मुख्यमंत्री बनने के बाद एक तानाशाही चेहरा लोगों के सामने आया. इसी परिप्रेक्ष्य में निम्नलिखित पंक्तियाँ कुमार विश्वास की शैली मे. कोई कमीना कहता है, कोई साला समझता है ! मगर क...