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ठहरा हुआ सफ़र

कल जो बुजर्गों का किस्सा था वोआज अपने साथ देखा सूरज की जवानी देखी  गर्मी का अहंकार देखा फिर रात की बैसाखी लिए अँधेरे में उसे गुम होते देखा ज़िन्दगी की ढलान पे सब वो खिलोनें दिखे जिनको सजाते संवारते उम्र तमाम होते देखा. आज वीरान अपना घर देखा तो कई बार झाँक कर देखा पाँव टूटे हुए नज़र आये एक ठहरा हुआ सफ़र देखा.