प्लास्टिक खाती गायें, किस राम को पुकारे कि चारा मिले,
हलाल होती गायें किस खुदा को पुकारें कि सहारा मिले
रेप होती मासूमों की ख़बरों में अनूप, वो ज़ायेका कहाँ.
जब तलक ना उसमें किसी मज़हब का बघारा मिले.
हलाल होती गायें किस खुदा को पुकारें कि सहारा मिले
रेप होती मासूमों की ख़बरों में अनूप, वो ज़ायेका कहाँ.
जब तलक ना उसमें किसी मज़हब का बघारा मिले.
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