पीके का आडम्बर
मैं ना पंडित और मौलवी ना मैं कोई पुजारी हूँ,
अपनी देसी परम्परा का, ना ही मैं व्यापारी हूँ
अपनी देसी परम्परा का, ना ही मैं व्यापारी हूँ
मैं तो एक भारतीय ठहरा, भौंचक्का हो आया हूँ,
आज शाम को आमिर तेरी फिल्म देखकर आया हूँ.
आज शाम को आमिर तेरी फिल्म देखकर आया हूँ.
मेरे अपने कुछ सवाल है,ज़रा खोलकर कान सुनो,
सुनो हिरानी,सुनो चोपड़ा,प्यारे आमिर खान सुनो,
सुनो हिरानी,सुनो चोपड़ा,प्यारे आमिर खान सुनो,
इस दुनिया के हर मज़हब में कहाँ नही कमियां बोलो,
और अछूती रीति रिवाजों से है कब दुनिया बोलो,
और अछूती रीति रिवाजों से है कब दुनिया बोलो,
धर्म सनातन आडम्बर है,और कहानी गढ़ लेते,
आलोचना करने से पहले गीता ही तुम पढ़ लेते,
आलोचना करने से पहले गीता ही तुम पढ़ लेते,
आडम्बर ही था दिखलाना,तो कुछ और बड़ा करते,
हर मज़हब के आगे,इसका मुद्दा आप खड़ा करते,
हर मज़हब के आगे,इसका मुद्दा आप खड़ा करते,
केवल धर्म सनातन ही क्यों तुमको चुभा बताओ जी,
कहाँ नही आडम्बर,कोई मज़हब तो दिखलाओ जी,
कहाँ नही आडम्बर,कोई मज़हब तो दिखलाओ जी,
आडम्बर है यदि देव को दूध चढ़ाना,मान लिया,
गौ माता को चारा देना,तिलक लगाना,मान लिया,
गौ माता को चारा देना,तिलक लगाना,मान लिया,
सारी दुनिया देखी मैंने फैला बस आडम्बर है,
होली ईद दीवाली फिर तो क्रिसमस भी आडम्बर है,
होली ईद दीवाली फिर तो क्रिसमस भी आडम्बर है,
लक्ष्मी दुर्गा शिव गणेश गर राह पड़े आडम्बर है
तो मस्जिद के पत्थर भी तो कहीं बड़े आडम्बर हैं,
तो मस्जिद के पत्थर भी तो कहीं बड़े आडम्बर हैं,
भूल गए तुम टोपी जालीदार दिखाना भूल गए,
जब नमाज़ की बारी थी आडम्बर कहना भूल गए
जब नमाज़ की बारी थी आडम्बर कहना भूल गए
अमरनाथ पर तंज कसे पर हज की बातें भूल गए,
मस्जिद और हज पे मिलता सरकारी खर्चा भूल गए,
मस्जिद और हज पे मिलता सरकारी खर्चा भूल गए,
अगर लेटकर मंदिर में आना जाना आडम्बर है
तो फिर या हुसैन कहकर कोड़े खाना आडम्बर है,
तो फिर या हुसैन कहकर कोड़े खाना आडम्बर है,
नहीं दिखाए तुमने कटते गाय बैल और बकरे क्यों,
केवल हिन्दू परम्परा के तौर तरीके अखरे क्यों,
केवल हिन्दू परम्परा के तौर तरीके अखरे क्यों,
हमने तो धागे बरगद के चारों ओर बंधाएं है,
तुमने हज में जाकर बोलो किसके चक्कर खाए हैं,
तुमने हज में जाकर बोलो किसके चक्कर खाए हैं,
तुम ज्ञानी हो अगर तुम्हे मंदिर आडम्बर लगते हैं,
हमको भी मस्जिद के मंज़र आडम्बर ही लगते हैं,
हमको भी मस्जिद के मंज़र आडम्बर ही लगते हैं,
सत्यमेव जयते के नायक,आधा सत्य दिखाया क्यों,
छुपा लिया इस्लाम,सनातन धर्म मिथक बतलाया क्यों,
इस पीके से खूब कमा लो,मौका तुमको दिया चलो,
पक्षपात जो किया आपने,हमने माफ़ किया चलो,
छुपा लिया इस्लाम,सनातन धर्म मिथक बतलाया क्यों,
इस पीके से खूब कमा लो,मौका तुमको दिया चलो,
पक्षपात जो किया आपने,हमने माफ़ किया चलो,
शर्त यही है थोड़ी हिम्मत लानी होगी छाती में,
अगली पीके फिल्म बनाओ जाकर आप कराची में.
फ़िल्मी फतवा देता कोई कैसे हिंदुस्तान में
ऐसी कोई फिल्म बनाओ जाकर पाकिस्तान में.
अगली पीके फिल्म बनाओ जाकर आप कराची में.
फ़िल्मी फतवा देता कोई कैसे हिंदुस्तान में
ऐसी कोई फिल्म बनाओ जाकर पाकिस्तान में.
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