बहुत देर कर दी राधिके !
आज तुम आयी हो फिर,
झुकी पलकों में छिपाये
उन अजनबी ख्वाबों का कारवां लिए
ऐसा लगता है थम गयी मेरी उम्र
थम गया समय
पर क्या समय किसी के लिए ठहरा है?
या फिर उस पर किसी का पहरा है
जो बीत गयी वो बात गयी
समय का इशारा है इसलिए कहता हूँ
बहुत देर कर दी राधिके पनघट तक आते आते
बहुत शिद्दत से सम्हाले रखा
उन मखमली लम्हों का खज़ाना
यकीं न हो तो जाओ छूकर देखो
उसी जगह आज भी उस दीवार पर
सिलवटें पड़ी है हमारे तुम्हारे गुफ्तगू के लहरदार लमहों की,
और जिसकी छाप आज भी तुम्हारे होठों
की थिरकनो में तुम्हे मिलेगी
पर इन बातों से समय का कोई सरोकार नहीं
समय का इशारा है इसलिए कहता हूँ
बहुत देर कर दी राधिके पनघट तक आते आते
तुम्हारी आस में देखी कई सावन की अठखेलियां
और जेठ कि तपती दुपहरिया
इक कुम्हलाई हुई याद, एक धुंधला सपना
एक युग बीता संजोते संजोते
मैं भी मौन रहा और
तुम भी चल दिए मुस्कराके हंसके
बहुत देर कर दी राधिके पनघट तक आते आते
झुकी पलकों में छिपाये
उन अजनबी ख्वाबों का कारवां लिए
ऐसा लगता है थम गयी मेरी उम्र
थम गया समय
पर क्या समय किसी के लिए ठहरा है?
या फिर उस पर किसी का पहरा है
जो बीत गयी वो बात गयी
समय का इशारा है इसलिए कहता हूँ
बहुत देर कर दी राधिके पनघट तक आते आते
बहुत शिद्दत से सम्हाले रखा
उन मखमली लम्हों का खज़ाना
यकीं न हो तो जाओ छूकर देखो
उसी जगह आज भी उस दीवार पर
सिलवटें पड़ी है हमारे तुम्हारे गुफ्तगू के लहरदार लमहों की,
और जिसकी छाप आज भी तुम्हारे होठों
की थिरकनो में तुम्हे मिलेगी
पर इन बातों से समय का कोई सरोकार नहीं
समय का इशारा है इसलिए कहता हूँ
बहुत देर कर दी राधिके पनघट तक आते आते
तुम्हारी आस में देखी कई सावन की अठखेलियां
और जेठ कि तपती दुपहरिया
इक कुम्हलाई हुई याद, एक धुंधला सपना
एक युग बीता संजोते संजोते
मैं भी मौन रहा और
तुम भी चल दिए मुस्कराके हंसके
बहुत देर कर दी राधिके पनघट तक आते आते

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