गली से उठता धुआं......
घर भर के लिए हर सुबह खुशियां पकाती है, सबक जिंदगी का है, वो स्कूल नहीं जाती है. टेडी बेयर उसके खिलोनों का हिस्सा नहीं, किस्मत में परी जगत का कोई किस्सा नहीं. सफ़ेद झालरों वाली फ्रॉक नहीं उसके पास, फिर भी कोई कड़वाहट नहीं उसके पास. वो कोमल फूल सी नहीं है, क्या करें, वो ज़िन्दगी की धूल है, क्या करें. उसकी दुनिया में बचपन का बसेरा नहीं होता, अंधेरों की जकड़ ऐसी, कभी सबेरा नहीं होता. रसोई उसका क्रीडांगन, हांड़ी तवा खिलौना है, थकी हारी जहाँ नींद मिले, वहीँ उसका बिछोना है. पूरी नींद सोती नहीं, अपनी किस्मत पे कभी रोती नहीं. ऐसी दुनिया भी दाता तेरी क्यूँ होती है, कहीं लबालब उजाला, तो कहीं रात होती है.