स्वागत है आपका, आइये पधारिये,
दायें बाएं देखकर आप भी बिराजिये,
रंगीन है चश्मा तो उसे फिर उतारिये  
बिना लाग लपेट के यूँ ही निहारिये.

मुल्क ये हसीन और बहुत संस्कारी है,
साधू है, साध्वी है, नेता व्यापारी है.
गणतंत्री जलसे की सुगबुगाहट जारी है
संसद के आसपास भीड़ बहुत भारी है.

गाँव और गलियों में मंच और वक्ता है,
भीड़ को जुटाने में लाभकारी भत्ता है,

रंगे पुते मुखड़े हैं, नाच है नचनिया है,
बगुलों के ग्रास हेतु, तैरती मछलियाँ है.
कोई है लूटता और कोई लुट रहा,
अस्मत कहीं तो कहीं, राजकोष लुट रहा
.
वादे हैं कसमे हैं, शोर है तमाशा है,
रंगे सियार हैं, लुभावनी भाषा है.
नौटंकी कलाकार, चोर और उचक्के
कुछ गूंगे बहरे, कुछ कच्चे पक्के

आलू टमाटर है, अदरख और लहसन है.
दलित और शोषित है, मुल्ले बिरहमन है
जुलूस है ईद का, राम की सवारी है
दंगों की आग है, लाशों की क्यारी है.

मुल्क ये हसीन और बहुत संस्कारी है,
गाय और गोबर है, सांप और मदारी है.
कहीं कुछ लड़कियां और बलात्कारी हैं
आसन की मुद्रा में योग के व्यापारी हैं.

फिरते हैं बहुरूपिये छटा बड़ी न्यारी है   
मुल्लों की टोपी तो, कभी जनेऊधारी है.
धर्म और मज़हब का खेल अभी जारी है
मुल्क ये हसीन है, प्राचीन संस्कारी है,

नेहरु की टोपी है, गाँधी का चरखा है,
लाल और हरा,कहीं गेरुए का ठसका है.
सूखी चपाती है अख़बारी  सुर्खियाँ
शाही पुलाव है ऑनलाइन मीडिया

टीवी डिबेट यहाँ मूर्खों का शोर है,
भड़काऊ बातों का रहता बस ज़ोर है.
बांच रहा जो अभी अनूप अध्याय है;
बातें जो कर रहा मुल्क का पर्याय है.



मुल्क ये हसीन है, प्राचीन संस्कारी है,




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