कांग्रेस के पास टीवी स्क्रीन में सुशोभित होने और देश विदेश के नेताओं के साथ हाथ मिलाते मुस्कराते खुबसूरत एक ख़ास वंश के चेहरे हैं, वंशवाद को पनपाने के लिए चाटूकारियों का रेलम पेल है , भ्रष्टाचार की फ़ेहरिश्त है, सरकार को समर्थन देने वाले कुछ भ्रष्ट नेताओं के लिए " लाइन में बने रहो वरना सीबीआई आ जाएगा" वाली डरावनी लोरी भी है, विशेष प्रकार की करामाती कठपुतलियाँ है जिसकी डोर "ऊपर वाले" के हाथों से बंधी है और राष्ट्रवाद को "कम्युनल" कहने का दर्शन उनके पास है। फिर नरेन्द्र के मोदी की क्या बिसात कि वे राजमाता और युवराज से टकराए? ये बहस तो बेमानी है।
कालचक्र
कल तक जो एक भव्य महल था, जीवन नृत्य था आँगन में , आज सिसकती भग्न दीवारें सन्नाटा है प्रांगण में दुःख और खुशियों का परचम जीवन में लहराता है फिर फिर जीना फिर फिर मरना काल चक्र दुहराता है -अनूप
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