पान सिंह तोमर
फिल्म की शुरुआत में ही एक गजब का संवाद है..जब
पत्रकार पानसिंह से पूछता है कि आप कैसे एक धावक से डकैत बने...जिस में पानसिंह का
जबाव कि ''डकैत नहीं, बागी..डकैत तो देश
की संसद में बैठते है"। पान सिंह तोमर का यह डायलॉग अभी भी कानों में गूँज
रहा है। हिंदुस्तान की ज़मीनी सच्चाई से जुडी और कमजोर य्ववस्था और भ्रष्ट
अधिकारियों के कारण चम्बल के बीहड़ में धकेले गए एक धावक के डाकू बनने की कहानी
-अरसे बाद इतनी खुबसूरत फिल्म देखने को मिली। मुख्य कलाकार इरफ़ान के अलावा जिस
दूसरे कलाकार ने प्रभावित किया- वोह हैं पत्रकार की भूमिका में ब्रिजेंदर काला .
मुझे लगा की आज मैंने क्रिसमस की छुट्टी का सही इस्तेमाल किया।

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